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अपनों को देखने के लिए लंबा इंतजार, आंखों के सामने आए तो मिलने की छटपटाहट, बेबसी ऐसी की दूर से हुआ मिलन



केंद्र सरकार के वंदे भारत अभियान के तहत विदेशों में फंसे प्रवासी राजस्थानियों का शुक्रवार से जयपुर पहुंचना शुरू हो गया। यहां दोपहर करीब 2 बजे लंदन से पहली फ्लाइट जयपुर एयरपोर्ट पहुंची। इससे करीब 149 प्रवासी राजस्थानी जयपुर पहुंचे। इनमें ज्यादातर प्रवासी राजस्थानी या तोस्टूडेंट थे या वहां जॉब कर रहे लोग। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और मेडिकल जांच के बाद इन सभी को बसों से होटल पहुंचा दिया गया। जहां अब वे 14 दिन क्वारेंटाइन रहेंगे। इसके बाद घर जा सकेंगे।इस बीच भास्कर संवाददाता ने एयरपोर्ट पर पहुंचकर देखा आंखों देखा हाल….

अपने बच्चों व बुजुर्गाें से मिलने के लिए, सिर्फ एक नजर निहारने के लिए इंतजार कर रहे लोग यूं शीशों में से बार-बार पैसेंजर लॉबी में अंदर देखते रहे

वहां नजरआया कि महिनों के बाद महामारी में फंसे अपनों की वतन वापसी पर उन्हें महज देखने के लिए परिजन रिश्तेदार करीब एक घंटे पहले ही एयरपोर्ट पहुंच गए। वे इधर उधरखड़े होकरइंतेजार करते रहे। कभी शीशे में से अंदर झांकर देखते। कभी फोन कॉल के जरिए अपनों से संपर्क करने की कोशिश में लगे रहे। आखिरकरीबडेढ़ घंटे का इंतेजार खत्म हुआ और एक-एक कर यात्री स्क्रीनिंग व अन्य खानापूर्तियों के बादयात्री एयरपोर्ट से अपना सामान लेकर बाहर आने लगे। इस बीच अपनों के सामने आानेपरउनसेमिलने की आस छटपटाहट बनकर रह गई। कोरोना महामारी की वजह से बेबसी ऐसी थी कि खड़े खड़े दूर से ही हाथों के ईशारे और नम आंखों से एक दूसरे के हाल जानते रहे। एयरपोर्ट पर ऐसा पहली बार होगा कि आंखों के सामने होने पर भी कोई अपनों से मिल नहींपा रहा था।

छह महिने बाद लौटी मां को बेटा दूर से ही नम आंखों से निहारता रहा, फिर सेल्फी लीं

छह महिने बाद मां को देखकर पार्थ दूर खड़ा रहा। मां और बेटा एक दूसरे को सिर्फ आंखों से निहारते रहे। लेकिन मिल नहीं सके

गोविंदपुरा, कालवाड़ रोड निवासी पार्थ की लंदन से 6 महिने बाद लौटी व्हीलचेयर पर बैठी अपनी मां रंजना झा को देखकर आंखें नम हो गई। एकबारगी मां के पैर छूकर आर्शीवाद ले लिया। फिर डिस्टेंस के नियमों का पालन करते हुए दूर खड़ा हो गया। मां को देखकर भावुक हुए पार्थ ने दूर से ही सेल्फी भी ली। कुछ मिनटों के लिए पार्थ अपनी मां को निहारता रहा। दूर से ही उनसे बात कर हाल पूछता रहा। बातचीत में कहा लंदन में बड़े भैया जॉब करते है। मां उनके पास ही थी। आज लौटी तो आंखें भर आई। मां से गले लगकर मिलने की इच्छा है। लेकिन महामारी में भावनाओं पर नियंत्रण रखना ही समझदारी है।

बेटे को देखकर पापा ने हाथों में दिए खर्च के लिए रुपए, फिर बोले- घबराओ मत, हिम्मत रखो

एमबीबीएस की स्टडी करने गए बेटे गौरव की वतन वापसी पर पेशे से ज्वैलर पिता संजय टाटीवाला ने उसे देखते ही खर्च के रुपए में पैसे दिए और कहा नर्वस मत रहो।
बेटे के एयरपोर्ट पर लौटने पर संजय टाटीवाला की उसे देखने के लिए बैचेनी बढ़ गई। वे बार बार पैसेंजर लॉबी में बैठे बेटे की फोटो मोबाइल में कैप्चर करने की कोशिश करते रहे

विवेक विहार, न्यू सांगानेर रोड जयपुर निवासी संजय टाटीवाला ने बताया कि उनका बेटा गौरव नौ महिने पहले एमबीबीएस की स्टडी करने लंदन गया था। वह आज लौटने वाला है, ऐसे में वे बहुत खुश है। उन्होंने गौरव के लिए होम क्वारेंटाइन के लिए तैयारी कर रखी थी। लेकिन अब सरकारी निर्देशों की पालना के लिए बेटे को 14 दिन के लिए और दूर रखना होगा। गौरव की मम्मी ने उसके लिए बहुत सी खाने पीने की चीजें बनाकर रखी है। हम गौरव के घर लौटने पर सेलिब्रेशन करेंगे। इसी बीच ज्योंही गौरव करीब दो घंटे के इंतेजार के बाद एयरपोर्ट से बाहर आया। संजय टाटीवाला ने अपनी जेब से कुछ नोट निकालकर उसे खर्ची के लिए दिए। उसने चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। फिर बेटे का हताश चेहरा देखकर कहा कि नर्वस मत रहो। हिम्मत रहो। घबराओ मत। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से संजय भी अपने बेटे को गले नहीं लगा सके। इसके पहले वे अपने साथी के साथ पैसेंजर लॉबी में बैठे बेटे को अपने मोबाइल में कैप्चर करने की कोशिश करते रहे। संजय ने बताया कि लंदन में गौरव काफी टेंशन में था। हमने उसे काफी समझाया। उसे हिम्मत दी। इससे वह तनाव को झेल गया।

पहली फ्लाइट में सबसे कम उम्र का यात्री कुलरंजन सिंह अपनी मां के साथ करता रहा अटखेलियां

अपनी मां ममता कंवर के साथ सबसे कम उम्र का प्रवासी राजस्थानी यात्री कुलरंजन सिंह अटखेलियां करता रहा।
जयपुर एयरपोर्ट के बाहर बस के इंतेजार में लगेज बॉगी पर बैठा सबसे छोटा यात्री कुलरंजन सिंह अपनी मां के साथ

शुक्रवार को लंदन से जयपुर आई पहली फ्लाइट में सबसे कम उम्र का यात्री थी मास्टर कुलरंजन सिंह। जो कि अपने पिता प्रताप सिंह और मां ममता कंवर के साथ जयपुर से लौटा था। वह एयरपोर्ट से लगेज पर बैठे बैठे बाहर निकला। बाहर आते ही हाथ हिलाकर प्यारी से मुस्कान बिखेरी तो वहां मौजूद अन्य लोग भी खुश हो गए। इसके बाद बस में सवार होने तक कुलरंजन अपनी मां के साथ अटखेलियां करता रहा। मूल रुप से राजस्थान में झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी नवासीकुलरंजन के पिता प्रताप सिंह ने बातचीत में बताया कि वह वर्क वीजा पर जॉब लंदन गए थे। पिछले दिनों उनका वीजा अवधि पूरी हो गई। ऐसे में उन्हें लंदन से वापस राजस्थान लौटना पड़ा। वहां से महामारी के बीच बचकर यहां आने पर वे काफी खुश है। हालांकि, वहां काफी परेशानी उठानी पड़ी।

एक घंटे पहले पहुंचे पुलिस अफसर, यात्रियों को बाहर निकालने की तैयारियां चलती रही

यात्रियों की फ्लाईट पहुंचने के एक घंटे पहले पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। उन्हें निर्देश देते मालवीय नगर एसीपी महेंद्र कुमार शर्मा

जयपुर एयरपोर्ट पर लंदन से आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट पहुंचने के करीब एक घंटे पहले डीसीपी पूर्व डॉ. राहुल जैन, एडिशनल डीसीपी मनोज चौधरी, एसीपी मालवीय नगर महेंद्र कुमार शर्मा जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान एसीपी महेंद्र शर्मा ने वहां मौजूद पुलिस कार्मिकों को बताया कि किस तरह उन्हें प्रवासी यात्रियों की बसों में बैठकर होटल तक उन्हें छोड़ना है। खुद की सुरक्षा का भी ध्यान रखना है। मास्क पहनकर रखना है। वहीं, सांसद रामचरण बोहरा भी जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद एयरपोर्ट अधिकारियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यहां यात्रियों के पहुंचने के पहले एयरपोर्ट अधिकारी व कर्मचारी भी काफी मुस्तैद होकर रिहर्सल करते नजर आए ताकि किसी तरह की कोई चूक नहीं हो जाए।


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कालवाड़ रोड निवासी पार्थ ने छह महिने बाद लंदन से लौटी मां को देखा। आंखें भर आईं। लेकिन गले नहीं लग सका। घर भी नहीं ले जा सका। ऐसे में मां के साथ सेल्फी जरुर ली।



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