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आरपीएफ-जीआरपी जवानों को देखते ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दिखे लोग, उन्हें डर था कि यात्रा से ना रोक दिया जाए



दो महीने के इं​तजार के बाद ट्रेनें एक बार पटरी पर आ गई हैं। 1 जून… यह वो दिन जब देश भर में 200 नियमित ट्रेनें (100 जोड़ी) संचालित हो रही हैं। मप्र की राजधानी भोपाल से देश की राजधानी दिल्ली तक जाने वाली ऐसी ही एक ट्रेन शान-ए-भोपाल से मैं सफर पर निकला हूं। इस सफर से जुड़ी हर बात आप लोगों के साथ शेयर करूंगा।

शाम के 7 बजे हबीबगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 और प्लेटफॉर्म नंबर-5 की ओर यात्रियों की लंबी कतार थी। हालांकि आम दिनों की अपेक्षा यह यात्री संख्या काफी कम थी। रेलवे परिसर में प्रवेश लेने के बाद खाकी वर्दी में आरपीएफ-जीआरपी के जवानों को देखते ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दिखे। उन्हें ये डर था कि कहीं यात्रा से ना रोक दिया जाए।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 और प्लेटफॉर्म नंबर-5 की ओर यात्रियों की लंबी कतार थी।

9.05 बजे की ट्रेन थी, 8.30 बजे तक स्टेशन पर आते रहे यात्री
रेलवे के नियमों के मुताबिक यात्रियों को 90 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना था, लेकिन यात्रियों का आना रात 8.30 बजे तक जारी रहा। रात 8.05 बजे जिला प्रशासन की ओर से अप्वाइंट डॉक्टर्स आए तब जाकर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू हो सकी। स्टेशन पर तैनात आरपीएफ के अधिकारी से जब डॉक्टरों के देरी से आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि इन डॉक्टर्स को जिस होटल में ठहराया गया है, वहां कुछ शि​फ्टिंग चल रही थी। इस कारण यह लोग देरी से पहुंचे।

थर्मल स्क्रीनिंग हुई, नाम-नंबर नोट कर दी एंट्री, आरोग्य सेतु एप के बारे में पूछा ही नहीं

डॉक्टर्स ने यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की, दूसरे काउंटर पर नाम-नंबर नोट किया और अंदर जाने दिया। लाइन में खड़े यात्रियों को इस प्रक्रिया से गुजरने में महज 2-3 मिनट का ही वक्त लगा। इस दौरान किसी भी रेल​कर्मी ने यात्रियों से आरोग्य सेतु एप के बारे में नहीं पूछा। इस दौरान करीब 99 फीसदी यात्री मास्क लगाकर आए थे। कुछ यात्री जो बिना मास्क के आए थे, उन्होंने स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही रुमाल को मास्क बना लिया।

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग तो हुई मगर आरोग्य सेतु एप के बारे में नहीं पूछा गया।

डीआरएम पहुंचे स्टेशन, यात्रियों से जाना हालचाल
स्टेशन पर भोपाल रेल मंडल के डीआरएम उदय बोरणकर, सीनियर डीसीएम नवदीप अग्रवाल और अन्य कुछ रेल अधिकारी पहुंचे। इन्होंने यात्रियों व रेलवे स्टाफ से बातचीत कर उनका हाल जाना। यात्रियों ने किसी भी तरह की दिक्कत होने से इनकार किया।

35 से 40 फीसदी सीटों पर ही यात्री नजर आए
ट्रेन में सभी कोच में करीब 35 फीसदी सीटों पर ही यात्री हैं। इनमें बुजुर्ग व एक-दो माह के बच्चे भी हैं। ज्यादातर लोग मजबूरी वाले हैं, कोई लॉकडान में फंसा था तो कोई आॅपरेशन कराने दिल्ली जा रहा है। ट्रेन के टीटीई ने बताया कि दिल्ली तक यह ट्रेन करीब 40 फीसदी यात्रियों के साथ ही जाएगी, इनमें से बाकी यात्री आगे के स्टेशनों से चढ़ेंगे। यह ट्रेन अपने निर्धारित समय 9.05 बजे से 8 मिनट की देरी से रात 9.13 बजे हबीबगंज के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से रवाना हुई।

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रेलवे के नियमों के मुताबिक यात्रियों को 90 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना था, लेकिन यात्रियों का आना आधे घंटे पहले तक जारी था।



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