सरकारी बैंकों को 5 महीने में 1.2 लाख करोड़ रुपए पूंजी की जरूरत होगी। इन बैंकों पर एनपीए का भारी-भरकम बोझ है, इसलिए इस रकम का ज्यादा हिस्सा सरकार को ही उपलब्ध

सरकारी बैंकों को 5 महीने में 1.2 लाख करोड़ रुपए पूंजी की जरूरत होगी। इन बैंकों पर एनपीए का भारी-भरकम बोझ है, इसलिए इस रकम का ज्यादा हिस्सा सरकार को ही उपलब्ध कराना होगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही है। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों को 53,000 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है। यानी बैंकों को इससे दोगुनी पूंजी की जरूरत होगी।

रिपोर्ट के अनुसार अगर सरकार बैंकों की इस जरूरत को पूरा करने का फैसला करती है तो उसका घाटा बढ़ना तय है। बजट में इस साल 3.3% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा गया था। अक्टूबर तक सरकार पूरे साल के घाटे के 95% तक पहुंच गई थी। सरकार ने अक्टूबर 2017 में बैंकों को 2.11 लाख करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया था। इसमें से अब तक 1.12 लाख करोड़ रु. उपलब्ध कराए गए हैं। बैंकों को कुछ रकम बाजार से भी जुटानी है। लेकिन एनपीए ज्यादा व वैल्यूएशन कम होने से बैंक बाजार से अब तक 12,000 करोड़ रुपए जुटाने में कामयाब हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा पूंजी की जरूरत उन 11 बैंकों को होगी जिन्हें रिजर्व बैंक ने त्वरित कार्रवाई (पीसीए) की श्रेणी में डाल रखा है। ये बैंक ना तो नया कर्ज दे पा रहे हैं और ना ही कोई नई ब्रांच खोल पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार बीते 3 वर्षों में सरकार ने बैंकों को 1.5 लाख करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं। लेकिन यह रकम इनके 1.3 लाख करोड़ रुपए के नुकसान को पूरा करने में ही गया है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा- बैंकों का एनपीए काफी, इसलिए सरकार को ही रकम देनी पड़ेगी

एसबीआई बाजार से 20 हजार करोड़ रुपए जुटाएगा

एसबीआई ने मंगलवार को कहा कि वह फॉलोऑन पब्लिक ऑफर और दूसरे माध्यमों से 20,000 करोड़ रुपए जुटाएगा। इस प्रस्ताव पर विचार के लिए 7 दिसंबर को शेयरहोल्डर्स की बैठक होगी। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने कहा है कि इस रकम का इस्तेमाल लॉन्ग टर्म फंडिंग, पूंजीगत खर्च और दूसरे कामों में होगा। 30 जून को खत्म तिमाही में एसबीआई की टियर-1 पूंजी 9.8% थी, पूंजी पर्याप्त का अनुपात 12.8% था।



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