विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ रुपए (करीब 537 करोड़ डॉलर) निकाले हैं। यह दो साल में सबसे अधिक है। इसी के साथ इस साल में पूंजी

विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ रुपए (करीब 537 करोड़ डॉलर) निकाले हैं। यह दो साल में सबसे अधिक है। इसी के साथ इस साल में पूंजी बाजार (इक्विटी और डेट मिलाकर) से विदेशी निवेशकों की निकासी एक लाख करोड़ रुपए के पार निकल गई है। इसमें 42,500 करोड़ रुपए इक्विटी से और 58,800 करोड़ रुपए डेट मार्केट से निकाले हैं।

डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में इक्विटी से 28,921 करोड़ रुपए और डेट मार्केट से 9,979 करोड़ रुपए निकाले हैं। यह नवंबर 2016 के बाद सबसे अधिक निकासी है। उस समय एफपीआई ने पूंजी बाजारों से 39,396 करोड़ रुपए निकाले थे।

विदेशी निवेशकों ने जनवरी, मार्च, जुलाई और अगस्त में कुल 32,000 करोड़ रुपए भारतीय बाजार में निवेश किए हैं। इनकी ओर से बिकवाली सितंबर अंत के बाद से बढ़ी है। सितंबर में इन्होंने 21,000 करोड़ रुपए की निकासी की थी।

पिछले महीने एफपीआई ने 38,900 करोड़ रु. निकाले, इससे पहले नवंबर 2016 में निकाले थे 39,396 करोड़

वैश्विक कारणों से हो रही है बिकवाली

वैश्विक इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म मॉर्निंगस्टार के सीनियर एनालिस्ट मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक क्रूड में तेजी, फेडरल रिजर्व के दरें बढ़ाने, डॉलर के मजबूत होने और चालू खाते का घाटा बढ़ने से विदेशी निवेशक बिकवाल बने हुए हैं। अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर से भारत जैसे उभरते बाजारों में शेयर बाजारों को लेकर आउटलुक फीका पड़ा है।

वैल्यूएशन ठीक रही तभी लौटेंगे निवेशक

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के जेएमडी रामदेव अग्रवाल का कहना है वैश्विक स्तर पर सिस्टम में कैश कम हो रहा है, इमर्जिंग मार्केट में निवेश घटा है। अमेरिका-यूरोप में स्टिम्युलस पैकेज वापस लिया जा रहा है। भारत में कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ नहीं बढ़ रही है। बाजार में और 3-4% की गिरावट आएगी। विदेशी निवेशक तभी लौटेंगे, जब उन्हें वैल्यूएशन ठीक लगेगी।



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