नई दिल्ली.पर्यावरण को लेकर लोगों में आई जागरुकता और पटाखे फोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के चलते इस बार पटाखों की बिक्री 40 फीसदी घट गई है। राजधानी

नई दिल्ली.पर्यावरण को लेकर लोगों में आई जागरुकता और पटाखे फोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के चलते इस बार पटाखों की बिक्री 40 फीसदी घट गई है। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतने खतरनाक स्तर पर चला गया है कि सरकार ने लोगों से पटाखा मुक्त दिवाली मनाने की अपील जारी कर दी।

इन सभी कारणों के चलते 20 हजार करोड़ रुपए का पटाखा बाजार अब इस उम्मीद से है कि आने वाले साल में ईको फ्रैंडली पटाखों को लेकर नई नीति बन जाएगी, जो पर्यावरण की रक्षा भी करेगी और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों का रोजगार भी बचा सकेगी। इस बार दिवाली में रात 8 से 10 बजे के बीच ही पटाखे फोड़े जाएंगे।

ऐसे में ईको-फ्रेंडली और ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ गई है। ईको-फ्रेंडली दिवाली को बढ़ावा देने के लिए काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने कम प्रदूषण करने वाले पटाखे बनाए हैं। यह पटाखे न केवल ईको-फ्रेंडली हैं बल्कि पारंपरिक पटाखों से सस्ते भी हैं।

पटाखा निर्माता और बेचने वाले संगठन के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि हमारा व्यवसाय पूरी तरह मौसमी है। यानी इसका 80 फीसदी व्यवसाय केवल दिवाली में ही होता है। इसलिए भविष्य के मद्देनजर सरकार को एक नीति तो बनानी ही होगी।

भले ही वह ईको फ्रैंडली यानी ग्रीन पटाखे बनाने पर हो। ग्रीन पटाखों से हानिकारक धूल और धुएं की जगह भाप और हवा निकलेगी लेकिन पटाखे के शौकीन लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इन पटाखों का विस्फोट कहीं से भी पारंपरिक पटाखों से कमजोर नहीं होगा।



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