अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली धरती पर तेजी से वन्य जीव खत्म हो रहे हैं। इस कारण इंसानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली

धरती पर तेजी से वन्य जीव खत्म हो रहे हैं। इस कारण इंसानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 44 सालों में 60 प्रतिशत वन्य जीवों में कमी पाई गई है। हाल ही में इस रिपोर्ट में आंकड़े सामने आने के बाद पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। उनके मुताबिक आने वाले समय में मच्छरों की तादाद बढ़ सकती है। फल व सब्जियां की पैदावार भी कम होगी। लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2018 के नाम से जारी रिपोर्ट में 1970 से 2014 से करीब चार हजार से ज्यादा प्रजातियों में शोध किया गया।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का कहना है कि इस रिपोर्ट में कीट-पतंगों के बारे में बात की गई है। ये सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इससे सबसे ज्यादा परागण (पॉलीनेशन) पर असर पड़ेगा। तितलियों, मधुमक्खियों, कीट पतंगों से परागण में सहूलियत होती है। इनकी कमी से फल-सब्जी के परागण में असर पड़ेगा। चीन में तो हालात ये हो गई है कि लोग खुद पेड़ पर चढ़कर कणों को फेंककर परागण की क्रिया करवाते हैं। यही वजह है आने वाले समय में आम, सेब, संतरा जैसे फलों की पैदावार पर असर पड़ेगा। सब्जियों की पैदावार में भी कमी आएगी।

वहीं बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के इकोलॉजिस्ट सेंटर मैनेजर सोहेल मदन ने बताया कि ड्रैगन फ्लाई की खासियत ये है कि जहां ये उड़ते हैं वहां मच्छर कम पनपते हैं। एक ड्रैगन फ्लाई दिन में दो सौ से ज्यादा मच्छर खा सकता है। ड्रैगन फ्लाई का बच्चा दिन में ढाई मच्छरों के अंडों को खा जाता है। अब देश में इनकी तादाद 80% कम हो चुकी है। जहां ये रहेंगे वहां मच्छर कम होंगे।



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