भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने राइड प्लेटफॉर्म ओला और उबर पर लगे प्राइस फिक्सिंग के आरोप को खारिज कर दिया है। इसका कहना है कि दोनों प्लेटफार्म के

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने राइड प्लेटफॉर्म ओला और उबर पर लगे प्राइस फिक्सिंग के आरोप को खारिज कर दिया है। इसका कहना है कि दोनों प्लेटफार्म के ड्राइवर सॉफ्टवेयर पर आधारित किराया वसूलते हैं। इसके अलावा समय और ट्रैफिक के हिसाब से भी इनका किराया तय होता है। इसलिए उनके बीच मिलकर किराया तय करने की कोई संभावना नहीं है। आयोग ने मंगलवार को इस सिलसिले में 13 पन्ने का फैसला जारी किया। यह शिकायत एक यूजर ने दर्ज कराई थी।

प्रतिस्पर्धा आयोग के फैसले के मुताबिक उबर ओर ओला के प्लेटफार्म पर हर राइड का किराया एल्गोरिदम (सॉफ्टवेयर) से तय होता है। इस सॉफ्टवेयर को दोनों कंपनियों ने तय किया है। आयोग के पास शिकायत आई थी कि दोनों प्लेटफार्म के ड्राइवर आपस में मिलकर किराया तय करते हैं। लेकिन आयोग का कहना है कि ऐसा करने के लिए दोनों प्लेटफार्म के ड्राइवरों के बीच समझौता होना जरूरी है। लेकिन जांच में ऐसा कोई समझौता सामने नहीं आया।

जांच के बाद आयोग ने कहा कि ऊबर और ओला के प्लेटफार्म पर किराया डायनेमिक होता है। यानी किराये में घट-बढ़ होती रहती है। इन ड्राइवरों या प्लेटफॉर्म के खिलाफ कोई न्यूनतम किराया तय किए जाने का सबूत नहीं मिला। कई बार तो इनका किराया स्वतंत्र रूप से से टैक्सी उपलब्ध कराने वाले ड्राइवरों की तुलना में बहुत कम पाया गया।

एक यूजर ने की थी शिकायत, लेकिन प्रतिस्पर्धा आयोग को जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला



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