अमित कर्ण। मुंबई।।मीटू मूवमेंट के चलते अच्छी चीज यह हुई है किबुरी नीयत वालों के चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। हालांकि इसके चलते फिल्मों में इंटीमेट सीन

अमित कर्ण। मुंबई।।

मीटू मूवमेंट के चलते अच्छी चीज यह हुई है किबुरी नीयत वालों के चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। हालांकि इसके चलते फिल्मों में इंटीमेट सीन फिल्माने में होने वाली दिक्कतें फिल्ममेकर्स और एक्टर्स के दिमाग में घुमड़ रही हैं। इस पहलू की ओर इमरान हाशमी ने ध्यान खींचा। उन्होंने कहा,हॉलीवुड फिल्मों की तर्ज पर यहां भी इंटीमेसी मैनेजर रखा जाना चाहिए,जो एनश्योर करेंगे किएक्ट्रेस अनकंफर्टेबल फील न करें।साथ ही हर प्रोजेक्ट के साथकलाकारों को सेक्शुअल क्लॉज साइन करवाया जाना चाहिए। ताकि फ्युचर मेंकोई किसी पर गलत आरोप मढे तो उसे क्वैश कियाजा सकेऐसा न होने पर संबंधित एक्टर्स के जहन से गैरजरूरी दवाब भी हटाया जा सकता है।

प्रोड्युसर मुकेश भट्ट कहते हैं, ‘भविष्य में अगर कोई कलाकार किसी पर गलत आरोप मढे तोचिंता का विषय हो सकती है।इंटीमेट सीन अगर स्क्रिप्ट की डिमांड है तोडर के साए में उसे कैसे फिल्माया जा सकता है?आलिया मेरी बेटी है। उसे फिल्म में किस करना है तो वह करती है न। अगर मुझे ऑब्जेक्शन है तो हम उसे हीरोइन नहीं बनाएंगे।रहा सवाल फ्युचर में गलत और सही आरोप मढ़ने का तो उस पर किसी का कोई कंट्रोल नहीं है।हां,सेक्शुअल हैरेसमेंट के संदर्भ मेंसतर्कता जरूर बरती जा सकती है।इंटीमेसी मैनेजर एक इलाज है,मगर सेट पर वह एडिशनल खर्च होगा।आइडियली बेहतर यहहोगा कि हम,आप और हर कोई अपने जमीर की सुने। उसे न मारे।नीयत में खोट नहीं है तो किसी को डर कर जीने या इंटीमेट सीन फिल्माने में दिक्कत नहीं होगी।



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