रवि श्रीवास्तव, अयोध्या .देश में इस समय राम मंदिर के निर्माण को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में अयोध्या नगर निगम ने 182 जर्जर मंदिरों की सूची जारी की है।

रवि श्रीवास्तव, अयोध्या .देश में इस समय राम मंदिर के निर्माण को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में अयोध्या नगर निगम ने 182 जर्जर मंदिरों की सूची जारी की है। हालांकि, स्थानीय पत्रकार भानु प्रताप का कहना है कि यहां 500 से ज्यादा जर्जर मंदिर होंगे। यहा छोटेमंदिरों की जमीनें या तो बिक गई हैं या उन पर कब्जा हो गया है। दूसरी तरफ अयोध्या में लगातार धार्मिक पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। इनके लिए भी उचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इन्हें कई बार मजबूरी में जर्जर मंदिरों में ही रुकना पड़ता है।

हाल ही में योगी सरकार ने अयोध्या को नगर निगम घोषित किया है। नगर निगम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि समय-समय पर जर्जर मंदिरों और भवनों को प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जाता है। उन्होंने बताया कि हमारी प्राथमिकता जनता की जान-माल की सुरक्षा है।

नोटिस के बाद भी खाली नहीं हुए मंदिर

मेयर का कहना है किया तो मंदिर स्वामी खुद जर्जर भवन ध्वस्त कर दें या फिर उसे प्रशासन जबरन गिरा देगा। उन्होंने बताया कि ऐसे कई मंदिर हैं जिन्हें नोटिस के बाद भी नहीं खाली किया गया है। इसके लिए कार्रवाई की जा रही है।

सरकार पर भेदभाव का आरोप
चतुर्भुजी मंदिर के महंत बलराम दास कहते हैं कि सरकार भी मंदिरों में भेदभाव करती है। दीपावली पर जो मंदिर राम की पौड़ी पर सामने थे उनकी रंगाई पुताई करवा दी गई जबकि हमारा मंदिर थोड़ा पीछे है तो उसे छोड़ दिया गया।कनक भवन के पास वैद्य का काम करने वाले आरपी पाण्डेय कहते हैं कि अयोध्या में श्री राम से जुड़े तकरीबन 5 हजार मंदिर हैं, लेकिन जातीय राजनीति में फंसी देश की पार्टियों को चुनाव के वक्त सिर्फ राम जन्म भूमि का मंदिर याद आता है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में ऐसे कई मंदिर हैं जिनका पौराणिक महत्व है लेकिन अब वह जर्जर हालात में हैं। इनका कोई हाल लेने वाला भी नहीं है।

200 मंदिरों की दशकों से नहीं हुई मरम्मत
पत्रकार भानु प्रताप बताते हैं कि अयोध्या में लगभग हर घर में मंदिर हैं। 200 मंदिर ऐसे होंगे जिनकी 30 से 35 साल से मरम्मत नहीं हुई है। उन्होंने बताया अयोध्या बाजार में शुक्ल मंदिर है। इसका निर्माण 1892 में हुआ था। यहां की मान्यता है कि महंतों ने यदि कुछ गलत करने का प्रयास किया तो उनको भगवान दंडित करते हैं। यहां 1979 से कोई मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। फिर भी मेलों में भक्त आकर रुकते हैं और यहां किरायेदार भी रहते हैं। मंदिर के पुजारी संत प्रकाश शुक्ल कहते हैं कि अभी मंदिर इतना भी जर्जर नहीं हुआ है कि इसे तोड़ा जाए।

पिछले साल अयोध्या में 1.5 करोड़ टूरिस्ट पहुंचे

अयोध्या में पर्यटकों का दबाव भीलगातार बढ़ रहा है। जिले के रीजनल टूरिस्ट ऑफिसर वीपी सिंह ने बताया कि अयोध्या में हर साल टूरिस्ट बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में एक जनवरी से 31 दिसंबर तक 1 करोड़ 25 लाख टूरिस्ट आए थे। जबकि 2017 में 1 करोड़ 41 लाख टूरिस्ट पहुंचे।वहीं, 2018 में 31 अक्टूबर तक एक करोड़ 45 लाख टूरिस्ट आ चुके हैं। दिसंबर तक यह आंकड़ा डेढ़ करोड़ से ऊपर जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं है।

मेयर का दावा- मंदिरों के लिए योजना बनाई जा रही
हालांकि, अयोध्या में बनी संत सभा के अध्यक्ष कन्हैया दास कहते हैं कि अभी संगठन का ध्यान रामजन्मभूमि पर श्री राम का मंदिर बनाने पर है। जब भगवान राम का मंदिर बन जाएगा तो सभी मंदिरों की व्यवस्था अपने आप सही हो जाएगी। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय कहते हैं कि जर्जर मंदिर जो कि पुराने हैं उनको सहेजने की योजना पर काम चल रहा है। शासन में प्रस्ताव भेजा गया है कि जिन मंदिरों का पौराणिक महत्व है, उनकी स्थिति सही करने का जिम्मा सरकार उठाए। जल्द ही इससे संबंधित योजना का एेलान किया जाएगा।

एेतिहासिक मंदिरों की भी स्थिति खराब

ज्यादातर मंदिरों की जमीन बिक गई या उन पर कब्जा कर लिया गया

चतुर्भुजी मंदिर के महंत बलराम दास बताते हैं कि एक समय राम की पौड़ी पर चतुर्भुजी मंदिर के पास सबसे ज्यादा जमीन थी। इन जमीनों पर या तो कब्ज़ा हो गया या किराएदार अब कमरा खाली नहीं कर रहे हैं। पूर्व में महंतों ने हाते (आंगन) की जमीन भी घर बनाने के लिए बेच दी। शुक्ल मंदिर के पुजारी संत प्रकाश कहते हैं कि बड़े मंदिर ताक में रहते हैं कि जिसकी हालत खराब हो उसे खरीद लिया जाए या कब्जा कर लिया जाए। मंदिर बचाने के लिए गरीब महंत या पुजारी मंदिर चलाते रहते हैं। शीशमहल मंदिर में भी किराएदार द्वारा कब्जे का मामला िववादों में है। एक किरायेदार तो अपना मकान बनने के बाद भी सिर्फ रात में सोने आता है।

2 लोगों की मौत के बाद शुरू हुआ था जर्जर मंदिरों को चिह्नित करना

सावन मेले में 16 अगस्त 2016 को लक्ष्मणघाट स्थित जर्जर यादव पंचायती मंदिर की छत गिर गई थी। इसमंे दबकर दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। जबकि चार से पांच श्रद्धालु घायल हो गए थे। जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी। दरअसल, अयोध्या में सावन मेला, कार्तिक पूर्णिमा और रामनवमी तीन प्रमुख मेले हैं। इनमें आने वाले श्रद्धालु मंदिरों में रुकतेे हैं। प्रशासन चाहता है कि जर्जर मंदिर में श्रद्धालु न ठहरें। लेकिन इसके विपरीत जिन मंदिरों ने अपने भवन नहीं गिराए हैं उनमें श्रद्धालु अभी भी रुकते हैं। इसका कारण ये भी है कि उन्हें ठहरने के लिए बेहतर जगह नहीं मिल पा रही है।

सब जर्जर: जो सीताजी को मुंह दिखाई में मिला, जहां शिव खुद आए

  • चतुर्भुजी मंदिर : यह मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना है। संत श्री रमता दास ने इसे बसाया था। महंत बलराम दास बताते हैं कि कोई ऊपरी आमदनी नहीं है। सावन मेला, कार्तिक पूर्णिमा और रामनवमी मेला होता है तब ही कुछ भक्त दर्शन को आते हैं। मंदिर जीर्णशीर्ण हो गया है इसलिए अब ज्यादा दर्शनार्थी नहीं आते हैं।
  • शीशमहल मंदिर : यहां की कर्ताधर्ता सुशीला सिंह बताती हैं कि स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि राजा दशरथ ने सीता माता को मुंह दिखाई में यह भवन दिया था। अब गेट जर्जर हो गया है। मंदिर का विवाद किराएदारों से चल रहा है। उन्होंने बताया कि जर्जर होने की वजह से कई नोटिस आ चुके हैं। हालांकि मंदिर स्थान सुरक्षित है।
  • दशरथ यज्ञशाला : महंत विजय दास बताते हैं कि यहीं पर राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था। इस मंदिर का 500 साल से पुराना इतिहास है। विजय दास कहते हैं कि जिन मंदिरों के पास पैसा है उन मंदिरों ने आगे का द्वार, अंदर सब बढ़िया करवा लिया है। उन मंदिरों के संतों की पहुंच भी सरकार में बैठे लोगों तक है।
  • श्रीरामनिवास मंदिर : मंदिर के आगे का बड़ा सा हिस्सा जर्जर अवस्था में है। महंत रामरंग शास्त्री कोने में शिवलिंग को दिखाते हुए कहते हैं कि जब श्रीराम का जन्म हुआ तब साधु वेश में ज्योतिष बनकर भगवान शिव उनका दर्शन करने पहुंचे थे। रामरंग शास्त्री ने बताया कि मंदिर का अगला हिस्सा जर्जर है। मंदिर भी तकरीबन 250 साल पुराना है। दर्शनार्थी आते रहते हैं। अभी कुछ सालों पहले पिछले हिस्से की मरम्मत कराई गई थी। जल्द ही अन्य हिस्सों की मरम्मत भी होगी।



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Report on the Shabby Temples of Ayodhya