हैदराबाद. सैटेलाइट हायसिस की लॉन्चिंग के बाद भास्कर ने इसरो चेयरमैन के. सिवन से आगामी योजनाओं को लेकर बातचीत की। पेश हैं चुनिंदा अंश...भास्कर : सैटेलाइट

हैदराबाद. सैटेलाइट हायसिस की लॉन्चिंग के बाद भास्कर ने इसरो चेयरमैन के. सिवन से आगामी योजनाओं को लेकर बातचीत की। पेश हैं चुनिंदा अंश...

भास्कर : सैटेलाइट लाॅन्चिंग में अन्य देशों ने इसरो की मदद क्यों ली?

के सिवन : लोग इसरो पर विश्वास करते हैं। हमारी लागत वर्ल्ड स्टैंडर्ड से 30% कम है। रॉकेट की यूनिट कास्ट हर देश में करीब समान है, लेकिन हमारे काम करने का तरीका लागत को कम कर देता है।

भास्कर :विदेशी सैटेलाइट की लॉन्चिंग से इसरो को कितना राजस्व मिलता है?
के सिवन :यह सीक्रेट है। हम इसका खुलासा नहीं कर सकते। विदेशी ग्राहक मोलभाव कर सौदा तय करते हैं। इतना कह सकता हूं कि हम अच्छी लागत वसूलते हैं।

भास्कर :इसरो जीसैट-11 की लाॅन्चिंग के लिए फ्रेंच गुआना क्यों जा रहा है?
के सिवन :जीसैट-11 हमारा अब तक का सबसे वजनी सैटेलाइट है। इसका वजन 5.86 टन है। हमारी जरूरत और क्षमता के बीच अंतर है। हम छह महीने में क्षमता बढ़ाएंगे।

भास्कर :इमेजिंग सैटेलाइट हाइसिस कब से और हर रोज कितने इमेज भेजेगा?
के सिवन :हायसिस का मुख्य काम किसी भी ऑब्जेक्ट की सटीक पहचान करना है। आज से पांचवें दिन यह पहली इमेज भेजेगा। अपनी जरूरत और उपलब्धता के आधार पर हाइसिस से अनगिनत इमेज हासिल की जा सकती हैं।

भास्कर :गगनयान की तैयारी कहां पहुंची, अंतरिक्ष यात्रियों का चयन हुआ?
के सिवन :गगनयान के लिए डिजाइन तैयार हो चुका है। अभी हम अपनी क्षमताओं के आकलन में लगे हैं। समूचे सिस्टम को अधिक से अधिक स्वदेशी बनाएंगे। डीआरडीओ और आईएएफ के साथ करार की प्रक्रिया जारी है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर के साझेदारों की जरूरत पड़ेगी।

भास्कर :इसरो की अागे की क्या योजना है? कितने सैटेलाइट लान्च करेंगे?
के सिवन :साल 2018 में इसरो की सात लॉन्चिंग हुई हैं। अगले एक महीने में दो लाॅन्च और होंगे। जनवरी के पहले सप्ताह में चंद्रयान-2 के साथ करीब 14 सैटेलाइट लाॅन्च करने की योजना है।

भास्कर :चंद्रयान-2 की लाॅन्चिंग के लिए इसरो ने पूरी तैयारी कर ली है?
के सिवन :चंद्रयान-2 की लाॅन्चिंग के लिए तैयारी अंतिम चरण में है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-आर्बिटर (चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा), लैंडर-विक्रम(चंद्रमा की सतह पर उतरेगा) और रोवर (चंद्रमा पर अलग-अलग परीक्षण करेगा)।



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इसरो चेयरमैन के. सिवन।