नई दिल्ली.नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए राज्यसभा में बुधवार को विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई। बहस के

नई दिल्ली.नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के लिए राज्यसभा में बुधवार को विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई। बहस के दौरान विपक्ष ने मांग की कि संविधान संशोधन विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। विपक्ष ने कहा कि हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, हम बिल को पेश करने के सरकार के तरीके के खिलाफ हैं। कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा- भाजपा अगर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीत जाती तो यह सरकार इस बिल को कभी नहीं लाती। सरकार ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर विधेयक पारित होने की राह में रुकावट डाल रहा है। इस बीच, समाजवादी पार्टी ने मांग की कि ओबीसी को भी 54% कोटा दिया जाए।

  • भाजपा: सभी ने केवल घोषणा पत्र में कहा, मोदी सरकार ने कर दिखाया
    भाजपा सदस्य प्रभात झा ने कहा- मंडल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सामान्य वर्ग में गरीबों के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव भी ऐसा ही चाहते थे। केवल नरेंद्र मोदी ने इसे पूरा किया है। हर राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में कहा गया है कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए वह आरक्षण देंगे। लेकिन, इसे केवल मोदी सरकार ने पूरा किया। हमें विकास के लिए साथ खड़ा होना चाहिए।
  • कांग्रेस: भाजपा को अब गलती का अहसास हुआ
    कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने कहा, "आप राजनीति के लिए ट्रिपल तलाक बिल लाए, मुस्लिम महिलाओं की बात की। लेकिन, दूसरी महिलाओं का क्या होगा? अगर आप मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव नहीं हारे होते तो यह सवर्ण आरक्षण बिल कभी नहीं लाते। जब आप जीत नहीं पाए तो आपने इस बारे में सोचा। भाजपा को अब अहसास हुआ कि कुछ गलती कर रहे हैं। कितने लोग 8 लाख से ज्यादा कमाते हैं? सच यह है कि लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोगों का रोजगार छीना जा रहा है। हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम भी इस मुद्दे का समर्थन करते हैं।"
  • सपा: आप ईमानदार होते तो 2-3 साल पहले बिल लाते
    सपा सदस्य रामगोपाल यादव ने कहा, "मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। लेकिन, यह कहना चाहता हूं कि यह बिल तो कभी भी लाया जा सकता था। इस बिल का मकसद 2019 के चुनाव हैं। अगर आपके भीतर ईमानदारी होती तो यह बिल आप 2-3 साल पहले लाते। 98 फीसदी उच्च वर्ग 8 लाख से कम कमाता है। आप इतने सारे लोगों को 10 फीसदी में कैसे समेट सकते हैं। आपने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50% की सीमा तोड़ने की कोशिश की। क्या कह अदालत में टिक पाएगा। हमारी मांग है कि ओबीसी को उनकी जनसंख्या के आधार पर 54% रिजर्वेशन दिया जाए। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिमों को आरक्षण दिया जाए।"
  • अन्नाद्रमुक: संविधान का उल्लंघन करने वाला कानून नहीं बना सकते
    अन्नाद्रमुक सदस्य ए नवनीतकृष्णन ने कहा, "संसद ऐसा कानून नहीं बना सकती है, जो मूल संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन करता हो। कई फैसलों के मुताबिक, इस संसद के पास वास्तविक अधिकार नहीं हैं कि वह ऐसे विधेयक को पास कर सके जो संविधान के मौलिक ढांचे का उल्लंघन करता हो। आरक्षण मौलिक ढांचा है।"

  • तृणमूल: विफलता की स्वीकरोक्ति है यह बिल
    तृणमूल सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, "मैं इस सरकार को चेतावनी देना चाहता हूं, जैसी हमने नोटबंदी के वक्त दी थी। हमने कहा था कि आपको सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने होंगे। वह आपसे पूछेंगे कि आपने क्या सर्वे किए हैं, बिल के लिए आपके पास क्या आंकड़े हैं, रोजगार कहां हैं। यह कोटा बिल इस बात की स्वीकरोक्ति है कि आप रोजगार पैदा करने में असफल रहे। आने वाले वक्त में गठबंधन सरकार आएगी, जिसके पास कॉमन मिनिमम प्रोग्राम होगा। अभी की सरकार एक पार्टी की सरकार है, जिसके पास मैक्सिमम कन्फ्यूज प्रोग्राम है।"

  • बीजद: यह बिल व्यावहारिक नहीं
    बीजद के सदस्य प्रसन्न आचार्य ने कहा- आप सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने जा रहे हैं। लेकिन, यहां 90% लोग हैं, जो इस दायरे से बाहर हैं। इसलिए यह बिल व्यावहारिक नहीं है।

कांग्रेस-सपा के समर्थन से सरकार की राह आसान

मंगलवार को पांच घंटे चली बहस के बाद यह लोकसभा में पास हो गया था।लोकसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल होने के चलते यह आसानी से पास हो गया। विधेयक के पक्ष में 323 और विरोध में 3 वोट पड़े। चर्चा के दौरान कांग्रेस-सपा-बसपा ने समर्थन की बात कही। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा चुनाव नजदीक होने पर इस बिल को लाने के लिए सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठाए। अगर राज्यसभा में भी ये पार्टियां समर्थन देती हैं तो मोदी सरकार के लिए बिल पास कराने की राह आसान हो जाएगी।

राज्यसभा में सांसदों की मौजूद संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए वहां दो तिहाई सांसदों यानी 163 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा (73) समेत एनडीए के पास 88 सांसद हैं। इनके अलावा बिल का समर्थन करने वाले विपक्षी दलों के राज्यसभा में 108 सांसद हैं। अगर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी ये सभी दल बिल का समर्थन करते हैं तो सांसदों की संख्या 196 हो जाएगी। जो जरूरी संख्याबल 163 से काफी ज्यादा है।

  • राज्यसभा में सांसदों की मौजूद संख्या 244
  • बिल पारित कराने के लिए जरूरी वोट 163
  • एनडीए 88 + कांग्रेस और अन्य दल 108 = 196


एनडीए रास सदस्य

भाजपा 73
जदयू 6
शिवसेना 3
अकाली 3
आरपीआई 1
बोडोलैंड फ्रंट 1
एसडीएफ 1
कुल 88


इन्होंने भी बिल कासमर्थन किया

कांग्रेस 50
सपा

13

तृणमूल 13
बीजद 9
तेदपा 6
टीआरएस 6
बसपा 4
राकांपा 4
आप 3
कुल 108


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