भोपाल (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया).विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद मिली जीत के बाद कांग्रेस यहां एक्शन मोड में है। मुख्यमंत्री कमलनाथ तेजी से फैसले ले रहे

भोपाल (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया).विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद मिली जीत के बाद कांग्रेस यहां एक्शन मोड में है। मुख्यमंत्री कमलनाथ तेजी से फैसले ले रहे हैं,तो दूसरी ओर भाजपा नजदीकी हार के तुरंत बाद से लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। पार्टी के विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों की बैठक हो चुकी है। किन सांसदों के खिलाफ एंटीइनकम्बेंसी है, उनकी लिस्ट बनाई जा चुकी है और इस तरह चुनावी रणनीति का प्रारंभिक चरण पूरा कर लिया गया है। पार्टी किसी भी तरह अपनी मौजूदा 26 सीटों (कांग्रेस ने उपचुनाव में झाबुआ-रतलाम सीट जीती) को बरकरार रखना चाहती है। हालांकि, विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भाजपा के कुछ नेता कम से कम 10 से 12 सीटों के नुकसान की आशंका जता रहे हैं।

2019 के चुनाव में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 2 सीटें (गुना और छिंदवाड़ा) जीती थीं। हाल के विधानसभा चुनाव में उसने वोटों के लिहाज से 12 लोकसभा सीटों पर बढ़त बनाई है। ये सीटें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, बैतूल, छिंदवाड़ा, मंडला, शहडोल, रतलाम, धार, खरगौन और देवास हैं। ऐसे में चर्चा यही है कि कांग्रेस सिर्फ विधानसभा चुनाव में मिली 12 सीट की बढ़त बरकरार रख पाती है या सीटें बढ़ा भी सकती है।


राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर कहते हैं कि अगले तीन महीने में राज्य की कांग्रेस सरकार कितना बेहतर करती है और केंद्र सरकार किस तरह का प्रदर्शन कर पाती है, इसी पर सब कुछ निर्भर करेगा। वहीं अंतिम समय में मोदी चुनाव प्रचार करके तस्वीर बदल देंगे, यह बात कर्नाटक और पांच राज्यों के परिणाम के बाद पूरी तरह साबित नहीं हुई है। इसलिए मोदी मुद्दा तो होंगे, पर प्रभावी नहीं।

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई कहते हैं कि भाजपा सरकार में ब्यूरोक्रेसी हावी थी, ऐसे में कांग्रेस पहले की सरकार से कितना अलग दिखती है और कार्य करती है, इससे ही वह जनता के बीच अपनी जगह बनाएगी। हालांकि, उसने किसानों को ऋणमाफी और पुलिस महकमे को साप्ताहिक अवकाश दे दिया है। परिस्थितियां ज्यादा नहीं बदलीं तो 2019 में कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़कर 12 से 15 हो सकती हैं।

वैसे भाजपा के महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि 2019 में देश में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गए विकास कार्य, योजनाएं और ईमानदारी मुद्दा होंगे। इसलिए हम 2014 की तरह फिर 27 सीटें जीतेंगे। इधर, कांग्रेस के लोकसभा में मुख्य सचेतक और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं कि 2019 के चुनाव के दौरान प्रदेश में दो ही मुद्दे होंगे। पहला- मोदी सरकार के वादे और दूसरा- हमारी राज्य सरकार का वादों पर अमल। मोदी सरकार ने युवा, छोटे व्यापारी, किसान सहित सभी वर्गों के लिए कुछ नहीं किया। वहीं राज्य में हमारी सरकार बनने के चंद घंटों के अंदर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ऋणमाफी की घोषणा की। मोदीजी की सरकार की पराजय सुनिश्चित है और मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को अच्छी खासी सीटें मिलेंगी।

राज्य में ये रहेंगे बड़े मुद्दे

  • किसानों की कर्ज माफी : मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ग्रहण के चंद घंटों बाद ही दो लाख रुपए तक के कृषि ऋणों को माफ करने की घोषणा की। मगर योजना सही तरीके से लागू नहीं होती है तो फिर भाजपा इसे मुद्दा बनाएगी।
  • बेरोजगारी : केंद्र सरकार और राज्य में बीते 15 साल रही भाजपा सरकार के दौरान युवाओं को कम रोजगार मिलने की बात कांग्रेस कहती रही है। उसने विधानसभा चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में बेरोजगारों के लिए कई योजनाओं और भत्तों की बात कही है।
  • सवर्ण आरक्षण : विधानसभा चुनाव में ऐसा माना गया कि सवर्ण वोटरों ने भाजपा के खिलाफ वोट किया। ऐसे में मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 फीसदी का आरक्षण दिया हैै। आरक्षण भी मुद्दा बना रहेगा।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की स्थिति

कुल सीटें 29
भाजपा 27 (अब 26)
कांग्रेस 02 (अब 03)


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