यूटिलिटी डेस्क. दैनिक जीवन में लोग बहुत सारी वस्तुओं की खरीददारी करते हैं। सामान अच्छा मिले इसके लिए व्यक्ति ब्रांडेड चीजें खरीद कर पैसे भी ज्यादा खर्च

यूटिलिटी डेस्क. दैनिक जीवन में लोग बहुत सारी वस्तुओं की खरीददारी करते हैं। सामान अच्छा मिले इसके लिए व्यक्ति ब्रांडेड चीजें खरीद कर पैसे भी ज्यादा खर्च करता है। अगर उत्पाद खराब और मिलवटी निकले तो व्यक्ति का अधिकार बनता है कि वह उपभोक्ता फोरम में इसकी शिकायत करे और मुआवजा लें। कोई उत्पाद नकली या फिर खराब मिलता है तो आपको उपभोक्ता फोरम में इसकी शिकायत करनी चाहिए। ऐसे में आप मुआवजे के हकदार हैं। आज हम आपको कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करने की प्रक्रिया के बारे में बता रहे हैं जिससे आप धोखा होने पर आसानी से किसी भी व्यापारी के खिलाफ, अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज कर सकते हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ सकते हैं।


शिकायत कौन कर सकता है?
कोई भी उत्पाद खराब निकलने पर कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकता है। इसके साथ ही कई भी पंजीकृत संस्था भी शिकायत कर सकती है।

शिकायत कहां करनी है ?
शिकायत कहां करनी है इसका निर्धारण कंज्यूमर के नुकसान के आधार पर किया जाता है। अगर नुकसान 20 लाख रुपए से कम का है तो जिला फोरम में इसकी शिकायत की जा सकती है। 20 लाख से ऊपर और 1 करोड़ रुपए से कम का नुकसान होने पर राज्य आयोग पर शिकायत दर्ज करानी होती है। अगर नुकसान एक करोड़ रुपए से ज्यादा है तो राष्ट्रीय आयोग पर शिकायत

दर्ज करानी होती है।

शिकायत दर्ज कराने के लिए क्या करें ?
उपभोक्ता एक सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर फोरम में दे सकता है। शिकायत में मामले का पूरा ब्योरा होना चाहिए कि घटना कहां और कब की है। इसके साथ ही शिकायत के समर्थन में उपभोक्ता को सामान बिल और अन्य दस्तावेज भी पेश करना होता है। शिकायत पत्र में यह भी लिखा जाता है कि आप सामने वाली कंपनी से कितनी राहत चाहते हैं।

शिकायत का निपटारा कैसे होता है?
शिकायत की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जल्दी ही फोरम इस पर सुनवाई करता है और उपभोक्ता को हुई हानि की भरपाई कराता है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर फोरम उपभोक्ता की मदद भी करता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की तरफ से एक राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर दिया गया है उपभोक्ता 1800114000 पर शिकायत कर सकता है।

फोरम के दो फैसले
पहला फैसला : भोपाल में संक्रमण वाला इंजेक्शन बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने मेडिकल स्टोर संचालक पर 7 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। फोरम ने आवेदक को इंजेक्शन की राशि वापस करने के अलावा परिवाद व्यय देने के आदेश दिए हैं। सनखेड़ा इटारसी निवासी दिनेश पटेल ने न्यू गुप्ता मेडिकल स्टोर, प्रोपराइटर आराधना मेटरनिटी एवं किडनी अस्पताल सोनागिरी भोपाल और अन्य के खिलाफ जिला फोरम में परिवाद दायर किया था।


दूसरा मामला : देश के 4,700 मरीजों को जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी का खराब हिप इम्प्लांट किया गया था, जिसकी वजह से कई मरीजों को दोबारा सर्जरी करानी पड़ी। कई मरीज दिव्यांग हो गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन मरीजों की पहचान करके मुआवजा दिलाने का निर्णय लिया है। कम से कम मुआवजा 20 लाख रुपये तय किया गया है। मरीजों की पहचान के लिए केन्द्र और राज्य स्तर पर कमेटी बनाई गई है। इसे 45 दिनों के अंदर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) को रिपोर्ट सौंपनी है। पीड़ित मरीज राज्य अथवा केन्द्रीय कमेटी के पास जाकर शिकायत कर सकते हैं।



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कोई भी उत्पाद नकली या फिर खराब निकलता है तो आप मुआवजे के हकदार हैं।