जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराजा डॉ. कर्ण सिंह सोमवार को सिमरिया में थे। वह यहां आयोजित नौ दिवसीय साहित्य महाकुंभ के अध्यक्ष हैं। माेदी सरकार की कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराजा डॉ. कर्ण सिंह सोमवार को सिमरिया में थे। वह यहां आयोजित नौ दिवसीय साहित्य महाकुंभ के अध्यक्ष हैं। माेदी सरकार की कश्मीर नीति, राम मंदिर, नोटबंदी समेत तमाम मुद्दों पर उनसे दैनिक भास्कर संवाददाता कुमार भवेश ने एक्सक्लूसिव बातचीत की।

सवाल: महाराजा के रूप में कश्मीर के हालात को आप कैसे देखते हैं ?
जवाब: सबसे पहले तो एक बात याद रखिए कि कश्मीर नामक कोई राज्य नहीं है। मेरे पूर्वजों ने जिस राज्य को बनाया व मेरे पिताजी जिस सियासत के राजा थे, उसका नाम जम्मू-कश्मीर है। यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी लोग जम्मू-कश्मीर को केवल कश्मीर बोलते हैं, जबकि कश्मीर पूरे राज्य का एक हिस्सा मात्र है। मुझसे राज्यसभा में भी पूछा गया था कि डॉक्टर साहब‌, कश्मीर का हाल बताइए, तो मैंने तब कहा था कि अजीब दास्तां है, ये कहां शुरू कहां खत्म, यह मंजिलें हैं कौन सी ना वह समझ सके ना हम। कश्मीर की समस्या में बहुत सारी चीजें हैं। इन दिनों एसेंबली भंग है। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एसेंबली भंग करने के बाद कहा कि अगर वह दिल्ली की तरफ देखते तो उन्हें सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाना पड़ता और यह बेईमानी होती। उनका यह बयान अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है। राज्यपाल का यह बयान आश्चर्यजनक है।

सवाल: क्या भाजपा कश्मीर को सही तरीके से टेकल कर पाई है ?
जवाब: सिर्फ इतना ही टेकल किया है कि अपनी विपरीत विचारधारा की पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। पीडीपी का तो चुनाव में नारा था कि आप हमें वोट देंगे तो हम बीजेपी से आपको बचा लेंगे। जीत के बाद पीडीपी ने सत्ता के लिए भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली। सरकार चलाने के लिए उनका कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तो ठीक ही था, लेकिन वह चल नहीं पाया। ऐन वक्त पर सरकार से बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया। अब कश्मीर के हालात के लिए बीजेपी पीडीपी पर सारा ठीकरा फोड़ रही है। पीडीपी और भाजपा की सरकार में कश्मीर में आतंकवादी मजबूत हुए हैं, इसका ठीकरा भाजपा पर फूटता इससे पहले ही वह पीडीपी से अलग हो गई। आतंकवाद का विरोध आर्म्ड फोर्स हर वक्त और हर सरकार में करते हैं, वह आज भी कर रहे हैं, कोई नई बात वहां नहीं हुई है।

सवाल: नोटबंदी से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगा?
जवाब: नोटबंदी से आतंकवाद में कोई कमी नहीं आई है।यह कहा जा रहा था कि कैश देकर पत्थरबाजों से पत्थर फेंकवाये जा रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि जम्मू-कश्मीर में नोटबंदी के कारण कोई खास बदलाव हुआ और आतंकवादी गतिविधियां कम हुई हैं। आंकड़े भी ऐसा कुछ नहीं बता रहे हैं कि नोटबंदी का आतंकवाद पर कोई प्रभाव पड़ा है।

सवाल: राम मंदिर पर सियासत हो रही है?
जवाब: राम मंदिर अयोध्या में बने, यह तो हर हिंदू चाहेगा। सुप्रीम कोर्ट में मामला है, निर्णय आने के बाद ही उसमें कुछ हल निकाला जा सकता है। भाजपा भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बिना नहीं चाहेगी राम मंदिर का निर्माण हो। उससे पहले कुछ करना मुझे लगता है, व्यावहारिक भी नहीं है।

सवाल: तब तो आम चुनाव में राम मंदिर मुद्दा होगा ?
जवाब: बिल्कुल, 2019 में राम मंदिर मुद्दा है। जनवरी में जब सुनवाई होगी तो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय देखना होगा कि वह आम चुनाव के बाद पूरे मामले को सुनती है या उससे पहले। लेकिन इस मुद्दे पर जितना जल्दी निर्णय हो जाए अच्छा है, वरना हर चुनाव में यह मुद्दा बनता रहेगा।

सवाल: ऐसा नहीं लगता कि राम बंट गए हैं?
जवाब: राम हर एक व्यक्ति के आराध्य हैं, ये किसी एक के नहीं हो सकते। हर किसी को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना चाहिए, शायद कांग्रेस भी यही चाहती है। मुझे नहीं लगता कि आम चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई निर्णय दे पाएगा। हर हिंदू चाहेगा कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। लेकिन, एक बात का हर वक्त ध्यान रखना होगा कि सारे भारतवर्ष के लोग हिंदू नहीं है, वहीं सारे हिंदू भी भारतवासी नहीं हैं। दुर्भाग्य है कि इतने दिनों से राम मंदिर निर्माण पर रस्साकशी चल रही है।

सवाल: राजनीति को धर्म से जोड़ना जायज है ?
जवाब: धर्म को राजनीति से जोड़ें ना जोड़ें, धर्म राजनीति से जुड़ा हुआ है ही। देश का बंटवारा ही मजहब के आधार पर हुआ है। यह कोई नई बात नहीं है कि धर्म और राजनीति को मिलाया जा रहा है। लेकिन, एक धर्म को अपना कर दूसरे धर्म का विरोध किया जाए, यह सही नहीं है। हमारे विचार में तो सर्व धर्म समभाव होना चाहिए। मैं मुस्लिम बहुल क्षेत्र का हूं। हमारे पूर्वज ने 100 साल राज किए हैं। 80% हमारे राज्य में रहने वाले लोग मुसलमान रहे हैं। हम तो मुसलमान के साथ रहने वाले लोगों में से हैं। धर्म के नाम पर तनाव पैदा करना अच्छा नहीं है। इससे देश को हानि है। एक बार देश को हानि हो चुकी है, बंटवारा हो गया।



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जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराजा डॉ. कर्ण सिंह।