पटना. चीफ जस्टिस एपी शाही ने उत्तर बिहार के दौरे के क्रम में एनएच 106 पर सफर किया। अनुभव कड़वा रहा। एनएच 106 की ही जर्जर हालत नहीं है। एनएच 107 तो और बुरी स्थिति

पटना. चीफ जस्टिस एपी शाही ने उत्तर बिहार के दौरे के क्रम में एनएच 106 पर सफर किया। अनुभव कड़वा रहा। एनएच 106 की ही जर्जर हालत नहीं है। एनएच 107 तो और बुरी स्थिति में है। इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि बारिश में पंप सेट से पानी निकालना पड़ता है। कुल मिलाकर सड़क की शिनाख्त ही मिट चुकी है। दोनों सड़कों का शिलान्यास एक साथ 2001 में हुआ था। 15 साल बाद योजना फाइलों से निकली, काम शुरू हुआ तो सिर्फ 14 किमी सड़क बनी और काम बंद हो गया।

  1. एनएच 107 का काम 2017 में काम गैमन इंडिया को मिला है। लेकिन कुछ खास काम नहीं हुआ। इस बीच सड़क की शिनाख्त लगभग मिट चुकी है। एनएच 31, 33, 80, 82,84 के भी हिस्से खराब हैं। एनएच 104, एनएच 30 भी बुरी स्थिति में हैं। कहीं टेंडर हो रहा है तो कहीं कंपनी चुन ली गई है। जीटी रोड (एनएच-2) के औरंगाबाद से वाराणसी के 193 किमी खंड का भी हाल खस्ता है। 7 साल में आधा काम हुआ है। पूरा होने में अभी और 4 साल लगेंगे।

    वह सब जो आप जानना चाहते हैं

    एनएच 106

    शिलान्यास जुलाई 2001
    स्वीकृति नवंबर 2011
    लागत 900 करोड़
    निर्माण खर्च 675 करोड़
    काम शुरू 2016 में
    कंपनी आईएल एंड एफएस

    एनएच 107

    शिलान्यास जुलाई 2001
    स्वीकृति सितंबर 2017
    लागत 892 करोड़
    निर्माण खर्च 736 करोड़
    काम शुरू 2017 में
    कंपनी गैमन इंडिया
  2. एनएच 106 को बनाने वाली आईएल एंड एफएस को कभी AA+ का दर्जा था। कंपनी 14 किमी सड़क बनाई और काम छोड़ दिया। इसे जंक स्टेटस यानी कबाड़ कंपनी के दर्जे में डाल दिया गया। कंपनी के पास देश के 20 हाईवे प्रोजेक्ट थे,जो बंद हो गए हैं। इनमें गया-डोभी रोड प्रोजेक्ट भी है।

    कुछ हाईवे अच्छे भी

    • लखीसराय में बड़हिया से लेकर मुंगेर या फिर बक्सर जिले के पुराना भोजपुर-नावानगर के बीच एनएच 120 का 22 किमी स्ट्रेच बेहतर और मानक के अनुरूप हैं।
    • एनएच 57, एनएच 327 भी दुरुस्त हैं। एनएच के ऐसे कई स्ट्रेच हैं।
    • राज्य के 28% एनएच तो सिंगल लेन वाले हैं और 1% एनएच मिसिंग लिंक की श्रेणी में भी हैं। मिसिंग लिंक यानी सड़क जहां कनेक्टिविटी खो देती है।
  3. मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद जब दैनिक भास्कर की टीम ने राज्य के अधिकतर नेशनल हाई-वे का मुआयना किया, राहगीरों से बात की तो कई स्थानों पर उनका जवाब रहा- जनाब, इन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) न कहें ! दोनों शब्द बड़े ही पवित्र हैं। बेशक, आप इन्हें सड़क कह सकते हैं, क्योंकि इन पर वाहन चलते हैं। बीते दशक में राज्य में एनएच की लंबाई बढ़कर 4917 किमी हो गई। जिस गति से एनएच का विस्तार हुआ, उस गति से निर्माण व रखरखाव नहीं हुआ। कहीं मामला फाइलों में उलझा रहा, कहीं कंपनी ब्लैकलिस्टेड हो गई, कहीं टेंडर की प्रक्रिया खिंची, कहीं मुकदमा हुआ, कहीं छोटे-छोटे स्ट्रेच भू-अधिग्रहण में फंसे। लंबा समय लग रहा है सड़कों को बनाने में। नतीजा हो रहा कि सड़कें दरकती/ मिटती जा रहीं।

  4. एनएच में अपग्रेड होने के बाद तो इन पर राज्य सरकार पैसे भी खर्च नहीं कर सकती। मेंटेनेंस का आलम यह है कि स्वर्णिम चतुर्भुज (एनएच-2) जैसी महत्वपूर्ण सड़क जगह-जगह दरक गई। इस सड़क का औरंगाबाद से बनारस के बीच 193 किमी का स्ट्रेच 6-लेन होना है। सात साल में 56% ही काम पूरा हुआ है। लंबी जद्दोजहद के बाद एनएच-30 बनाने वाली कंपनी अब फाइनल हुई है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर भी कई स्ट्रेच में गड्‌ढे उभर आए हैं। एनएच 104 की तो हालत बहुत ही पतली है। एनएच की ऐसी हालत के पीछे एक कारण यह भी है कि देश में कुल एनएच का 4.9% बिहार में है, जबकि खर्च में हिस्सेदारी 2% के आसपास है। लिहाजा एनएच को दुरूस्त करने के लिए लंबाई और बजट में कहीं न कहीं संतुलन भी साधना होगा। निर्माण की राह में आने वाले रोड़े भी उतनी तेजी से दूर करना होगा।

  5. 1981 में बने एनएच 30 की हालत 2010-11 आते-आते दरकने लगी। अभी मोहनिया से आरा के बीच 116किमी का सफर तय करने में 5 घंटे लगते हैं। सड़क बुरी तरह टूट चुकी है। कई स्थानों पर तीन-तीन फीट गहरे गड्‌ढे हैं। निर्माण का कांट्रेक्ट पहले अटलांटा कंपनी को दिया गया था। जमीन अधिग्रहण से लेकर कई अड़चनें आईं जो केंद्र और बिहार सरकार कानूनी दांवपेच के लफड़े में उलझ गई। मामला लटक गया। लेकिन इस सड़क की अहमियत ने दोनों सरकारों को नई राह दिखाई। लिहाजा बिहार सरकार ने इस योजना को केन्द्र के पाले में धकेल दिया। अब इस सड़क का काम शोभाराम शर्मा कंपनी को दिया गया है।

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  6. बरियारपुर से झारखंड बॉर्डर तक जाने वाली एनएच 333 में 141 किलोमीटर लंबी सड़क 13 किलोमीटर तक महज 10 फीट चौड़ी है। बिहारशरीफ से जमुई से झारखंड सीमा को जोड़ने वाली 198 किलोमीटर लम्बी एनएच 333ए के 2 पुल क्षतिग्रस्त हैं। बड़े वाहनों का परिचालन बंद है।

  7. दलसिंहसराय एनएच-28 पर लंगड़ा चौक के पास सड़क के बीचो-बीच गड्ढा है। बरौनी- समस्तीपुर मुख्य मार्ग होने की वजह से हजारों गाड़ियां गुजरती है। यह एक साल से जर्जर थी, इसे एक महीने पहले एनएचएआई ने रिपेयर करते हुए गड्ढा को भरने का काम किया था। आज भी कुछ जगहों पर गड्ढा है।

  8. निर्माण डेढ़ साल से चल रहा है। लौरिया से चौतरवा तक एनएच बन चुका है तथा चौतरवा से पिपरिया तक एक साइड से सड़क बन चुकी है तथा शेष सड़क पर गिट्‌टी बिछाया जा चुका है। मदनपुर से पनियहवा तक सड़क चलने लायक नहीं है। कार्य की गति बिल्कुल धीमी है। अधिकतर जगहों पर कार्य की रफ्तार एकदम धीमी है।

  9. मधौल और रामदयालु के बीच एनएच पर जगह-जगह गड्‌ढे हैं। मुजफ्फरपुर से गुजरने वाले सभी 6 एनएच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जिम्मे हैं। इन सभी एनएच की स्थिति ठीक है, लेकिन भूमि अधिग्रहण में पेच से कुछ स्थानों पर मार्ग जर्जर है।

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  10. गया से पटना की दूरी 85 किमी है। दोनों शहरों को जोड़ने वाली एनएच 83 की हालत गया और जहानाबाद के बीच ऐसी है कि वाहन चालक का ध्यान एक्सेलेटर से ज्यादा चालक का ब्रेक पर रहता है। 2014 में डोभी तक सड़क का टेंडर हुआ। 2015 करोड़ की लागत से सड़क 4-लेन बननी है। इसे भी आईएल एंड एफएस ही बना रही थी। कंपनी काम छोड़ चुकी है।

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  11. बोधगया से राजगीर को जोड़ने वाली यह सड़क मानपुर से जगजीवन कॉलेज तक बहुत खराब है। राजगीर में अंतराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव के लिए सड़क बनी लेकिन छह माह के भीतर ही गड्‌ढे फिर उभर आए। काम गायत्री कंस्ट्रक्शन के पास है।

  12. छपरा शहर से होकर गुजरने वाली छपरा-हाजीपुर एनएच 19 की हालत कुछ जगहों पर काफी जर्जर है। शहर के भगवान बाजार थाना रोड जर्जर बन चुकी है। नाला का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। ब्रम्हपुर के पास मोड़ पर गड्‌ढा है। डोरीगंज में स्थिति बदतर है।

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  13. दरभंगा जिले से दो एनएच गुजरते हैं। एनएच 57, जिसे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर कहते हैं । एनएच 527-बी दरभंगा के दिल्ली मोड़ से जयनगर तक जाती है। फिलहाल दोनों सड़कों की स्थिति ठीक है। सिमरी थाना अंतर्गत आने वाले एनएच-57 को शोभन चौक से बिठौली चौक तक हाल में ही दुरुस्त किया गया। 8 किमी पड़ने वाले एनएच-57 पर जगह-जगह गड्‌ढ़े थे। लेकिन, एनएचएआई ने उन गड्ढ़ों को भरकर दोबारा पिचिंग का काम किया।

    बेगूसराय शहर से दो एनएच गुजरती है। एनएच 28 और एनएच 31, बीहट जीरोमाइल से प्रारंभ होने वाले एनएच-28 की स्थिति कमोवेश बेहतर है। हालांकि सिमरिया से प्रारंभ एनएच 31 की हालत बीहट तक खराब है। बेगूसराय मुख्यालय से साहेबपुरकमाल की तरफ बढ़ने पर एनएच-31 की हालत सुरदसा ढाला तक ठीक है। फोरलेन निर्माण होने के कारण सुरदसा ढाला तक फोर लेन की विस्तारित सड़क एनएच-31 की टूटी सड़क के विकल्प के रूप में लोग इस्तेमाल करते हैं।

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  14. टेंडर हुआ पर काम शुरू नहीं : सीतामढ़ी में एनएच-104 पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। जिले के बथनाहा, सुरसंड में सड़क की स्थिति बेहद खराब है। रोजाना हजारों से अधिक वाहनों का आना-जाना इस मार्ग से होता है। सुरसंड के बीडीओ मो. यूनीस सलीम ने बताया कि सड़क निर्माण का टेंडर हो चुका है। सड़क निर्माण कंपनी से बात कर वे जल्द इसकी मरम्मत कराएंगे। यह सड़क मार्ग सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण जिले के आलावा पड़ोसी देश नेपाल की खुली सीमा से सटा है। कई राज्यों के पर्यटक सफर करते हैं।

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  15. गोपालगंज से छपरा तक 94.5 किलोमीटर एन एच 85 का काम 2015 से जारी है। सिवान जिले में इस सड़क की लंबाई 36 किलोमीटर है। सड़क 2008 से खराब है। निर्माण कार्य 2011 मे शुरू हुआ। तब से चल ही रहा है। पहले काम करने वाली कंपनी ने काम छोड़ा तो मामला 4 साल लटका रहा। 2015 में एक नई कंपनी ने काम शुरू किया जो चल रहा है जबकि काम 2018 में पूरा हो जाना था। सिवान जिले में बिंदुसार से दरोगा हाता तक जमीन का मुआवजा नही मिलने के चलते काम बंद पड़ा है। जिससे लोगों को सिवान शहर के जाम में घंटों फंसना पड़ता है। जीआर कंपनी के आशीष पांडेय ने बताया कि जमीन नही मिलने के कारण एन एच के बाईपास क्षेत्र में काम हो रहा है।

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  16. डुमरांव अनुमंडल के ब्रह्मपुर प्रखंड के महाराजगंज गांव से शुरू होती है और बक्सर व पटना को जोड़ती है। इस सड़क के 40 किमी स्ट्रेच में 138 गड्‌ढे हैं। कई इलाके ऐसे हैं जिसे लोग भगवान का नाम लेकर पार करते हैं। पुराना भोजपुर के पास दो ऐसे गड्ढे हैं जिन्हें प्रशासन 10 दिन के अंतराल पर भरता है। समस्या पिछले 7-8 साल से बनी हुई है। 825.17 करोड़ की लागत वाली इस सड़क का शिलान्यास 22 जुलाई 2017 को हुआ था। 25 किमी में भू-अधिग्रहण का काम बाकी है। जनवरी 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

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  17. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेश गढ़वाल की मानें तो काम अगले चार साल में भी पूरा नहीं हो पाएगा। जब प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब मौके पर जमीन नहीं थी। आज भी सिक्स लेन के लिए जमीन मौजूद नहीं है। यही कारण है कि एनएचएआई बार बार सड़क निर्माण कंपनी सोमा को हिदायत देती रही। सड़क निर्माण कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंची और उसके बाद सड़क निर्माण कंपनी और एनएचएआई के बीच एक नया सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट हुआ। तय हुआ कि मौके पर जितनी जमीन मौजूद है उसी पर सिक्स लेन निर्माण का काम किया जाए। मौके पर जमीन मौजूद नहीं होने की वजह से क्रॉसिंग वाली जगह पर फोरलेन सड़क रहेगी। इधर जिला भू अर्जन विभाग की मानें तो सड़क निर्माण कंपनी को जरूरत के मुताबिक जमीन मुहैया करा दी गई है।

    स्वर्णिम चतुर्भुज की हकीकत

    • औरंगाबाद से वाराणसी के बीच एनएच 2 छह लेन की बननी है। 192.4 किमी लंबी इस सड़क का काम सितंबर 2011 में शुरू हुआ। मार्च 2014 तक काम पूरा होना था।
    • छह साल में 56% ही काम पूरा हुआ है। एनएच-2 के 786 से 978 किमी के बीच होना है काम। सितंबर 2011 से ही कंपनी वसूल रही है टोल-टैक्स।
    • 3379.45 करोड़ है प्रोजेक्ट की कुल लागत। 6-लेन की सड़क के लिए कैमूर जिले में 33.588 हेक्टेयर और रोहतास जिले में 31.0279 हेक्टेयर जमीन चाहिए।

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  18. 2011-12 में काम शुरू हुआ पर अधूरा है। भागलपुर में 4 पुल, 4 साल में 1 भी नहीं बना।

  19. फरवरी तक हो जाएगी सड़क की मरम्मत। दो कंपनियां मिलकर कर रही हैं तेजी से काम।

  20. बिहारशरीफ से अरवल जाने वाली इस सड़क पर थे कई स्पीड ब्रेकर, हटाए जा रहे हैं सभी।

  21. कोढ़ा से कुर्सेला तक की 50 किमी दूरी तय करने में लगता है दो घंटे से अिधक का समय।

  22. काम आधा-अधूरा छोड़कर तांतिया कंस्ट्रक्शन चली गई। एनएच, अधूरी सड़क को मोटरेबल बना कर काम कर रहा है। चकिया से शिवहर-सीतामढ़ी होते जयनगर से निर्मली के पास एनएच 42 में मिलने वाली एनएच-104 का दोहरीकरण आज तक नहीं हो सका।



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      महेशखूंट से सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया जाने वाला सिंगल लेन एनएच : इस वैतरणी को पार करने में हमेशा जान का खतरा।