नई दिल्ली. तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख अब 500 करोड़ रुपए तक के हथियार और गोला-बारूद खरीदने के फैसले ले सकेंगे। पहले ये सीमा 100 करोड़ रुपए थी। रक्षा मंत्रालय ने

नई दिल्ली. तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख अब 500 करोड़ रुपए तक के हथियार और गोला-बारूद खरीदने के फैसले ले सकेंगे। पहले ये सीमा 100 करोड़ रुपए थी। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को यह फैसला सशस्त्र सेनाओं की युद्ध की तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए लिया।

रक्षा मंत्रालय ने कहा- सशस्त्र बलों के राजस्व प्रबंधन में लिए जाने वाले फैसलों में तेजी लाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है। इससे सशस्त्र बलों के लिए हथियार और युद्ध सामग्री को बढ़ाने में मदद मिलेगी और सेना का संचालन तेजी से किया जा सकेगा।

15 हजार करोड़ की हथियार निर्माण परियोजना को दी थी मंजूरी
पिछले कुछ समय में रक्षा मंत्रालय ने हथियारों और गोला-बारूद खरीदने की प्रक्रिया को आसान करने और निर्णय लेने के अधिकारों को विकेंद्रीकृत करने के लिए कई फैसले लिए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 2 साल के दौरान 20 हजार करोड़ के हथियार और गोला-बारूद के समझौते फाइनल हुए हैं। इसी साल मई में सरकार ने 15 हजार करोड़ के हथियारों की निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी थी। इसके तहत देश में ही आधुनिक तकनीक वाले हथियार और टैंक बनाए जाएंगे।


गोला-बारूद की कमी पर कैग ने उठाए थे सवाल
कैग ने जुलाई 2017 में अपनी रिपोर्ट में सेना में गोला-बारूद के प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। इसमें कहा गया था कि सेना में गोला-बारूद की कमी चिंता की बात है। इससे युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता पर असर पड़ रहा है।

  • कैग ने सरकार को चेताया था कि फौज के पास बेहद कम गोला-बारूद बचा है। आज अगर आर्मी को जंग करनी पड़ जाए तो इस्तेमाल किए जाने वाले असलहों (हथियार और दूसरे सामान) में से 40% तो 10 दिन भी नहीं चल पाएंगे।
  • 70% टैंक और तोपों के 44% गोलों का भंडार भी 10 दिन ही चल पाएगा। नियमानुसार कभी भी जंग के लिए तैयार रहने के लिए 40 दिन लायक गोला-बारूद होना चाहिए।
  • रिपोर्ट में कहा गया, "मार्च 2013 के बाद भी सेना के गोला-बारूद भंडार में गंभीर कमी और गोला-बारूद की क्वालिटी में खास सुधार नहीं आया। देश में 152 तरह के असलहे में केवल 61 प्रकार के ही मौजूद हैं।'


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