न्यूज डेस्क। एपल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की डेथ को लेकर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा दो बेटियां और पत्नी

न्यूज डेस्क। एपल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की डेथ को लेकर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा दो बेटियां और पत्नी हैं। परिवार ने मीडिया को बताया कि विवेक का एनुअल पैकेज करीब 75 लाख रुपए था। उनके जाने के बाद अब परिवार का क्या होगा? इसे लेकर कई लोगों के जहन में सवाल उठ रहे हैं। हमने इस बारे में एपल में प्रोडक्ट मैनेजर रह चुके और अभी यूएस में टेक्नोलॉजिस्ट सिद्धार्थ राजहंस से बात कर जाना कि आखिर

एपल इस तरह से अपने इम्प्लॉई की डेथ होने पर क्या करती है। इम्प्लॉई को क्या बेनिफिट्स दिए जाते हैं। हालांकि जरूरी नहीं कि ये सभी बेनिफिट्स विवेक के परिवार को मिलें। किसे क्या बेनिफिट्स मिलना हैं, ये इम्प्लॉई के केस, प्रोफाइल और लोकेशन पर भी डिपेंड करता है। यहां कुछ कॉमन बातें बताई गई हैं जो कंपनी जनरली फॉलो करती है।

सिद्धार्थ ने बताया कि एपल में ऑन साइड और आउटसोर्स दो तरह के इम्प्लॉई नियुक्त किए जाते हैं। जो हेडक्वार्टर में सीधे कंपनी के साथ काम करते हैं वे ऑन साइड इम्प्लॉई कहलाते हैं। वहीं जो दूसरे देशों के अलग-अलग बेल्ट में काम करते हैं वे आउटसोर्स इम्प्लॉई कहलाते हैं। विवेक तिवारी सप्लाई चैन डिविजन में थे और आउटसोर्स इम्प्लाई थे। दोनों इम्प्लॉई के बेनिफिट्स में थोड़ा अंतर है लेकिन कंपनी दोनों का ही पूरा ख्याल रखती है। कई तरह के बेनिफिट्स इन्हें दिए जाते हैं।

क्या बेनिफिट्स देती है कंपनी
- यदि जॉब के दौरान किसी इम्प्लॉई की डेथ होती है तो कंपनी उसकी तीन तरह से मदद करती है। फाइनेंशियल, हेल्थ केयर और एजुकेशन।
- ऐसे में कंपनी परिवार को ढाई लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपए) तक की मदद सामान्य तौर पर करती है। यदि कंपनी का काम करते ही जान गई है तो फिर तो यह मदद मिलियन में हो जाती है।

- यूरोप में एपल के डाटा सेंटर में एक इम्प्लॉई की काम करते वक्त जान गई थी तब उसके परिवार को कंपनी ने 3 मिलियन के करीब फाइनेंशियल मदद की थी।

और क्या मिलता है...
- कंपनी मृतक की पत्नी, भाई या बच्चों में से जो भी एलिजिबिलिटी पूरी करता हो उसे जॉब ऑफर करती है।
- इनमें से किसी के पास टेक्निकल डिग्री नहीं है तो उन्हें भी दूसरे तरह की जॉब ऑफर की जाती है।
- मृतक के बच्चों का पूरा एजुकेशन कंपनी देखती है। ऐसे मामलों में कंपनी ने पीएचडी तक बच्चों को करवाई है।

हेल्थ का खर्चा...
- ऐसे में कंपनी बुजुर्ग माता-पिता की हेल्थ का खर्चा भी उठाती है।
- मृतक इम्प्लाई की हेल्थ पॉलिसी को कंपनी एक्सटेंड करती है और उसके परिवार को पहले की तरह बेनिफिट मिलते रहते हैं।
- माता-पिता पत्नी और बच्चों को कोई भी गंभीर बीमारी होती है तो उसमें कंपनी इलाज का पूरा खर्चा उठाती है।



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