सुबह से लगातार इशारों में बतिया रहे हाजी से मैंने कहा, ‘अमां हाजी! ये सुबह से क्या नई नौटंकी लगा रखी है?’ हाजी ने पहली बार ज़ुबान खोली, ‘ये नौटंकी नहीं

सुबह से लगातार इशारों में बतिया रहे हाजी से मैंने कहा, ‘अमां हाजी! ये सुबह से क्या नई नौटंकी लगा रखी है?’ हाजी ने पहली बार ज़ुबान खोली, ‘ये नौटंकी नहीं हमारा-तुम्हारा सीज़ फ़ायर है महाकवि।’ मैंने कहा, ‘बातचीत बंद करने को सीज़ फ़ायर नहीं कहते हैं।’ हाजी चहके, ‘ये तो मुझे भी मालूम है लेकिन, झगड़ा टालने का सबसे आसान तरीका यही है कि बातचीत ही न करो।’

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